राजनीति
दासानिया में अवैध पट्टे को लेकर बवाल, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
पब्लिक स्वर,शेरगढ़/दासानिया। राजस्थान के शेरगढ़ तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत दासानिया में जमीन के अवैध पट्टे को लेकर विवाद अब गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि बिना वैध दस्तावेज और बिना बंटवारे की प्रक्रिया के जमीन को दासानिया निवासी निर्मला/मगराज के नाम दर्ज कर पट्टा जारी किया गया। इस पूरे मामले में पटवारी और सरपंच की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कथित तौर पर लेन-देन के जरिए मगराज सोनी और पत्नी निर्मला सोनी के नाम पट्टा तैयार करवाया गया। इस मामले में पहले भी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद हो चुका है।
मामले को लेकर खबर सामने आने के बाद पट्टा निरस्त किए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद संबंधित जमीन पर कब्जा अब तक नहीं छोड़ा गया है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि पट्टा वास्तव में निरस्त हो चुका है तो मौके पर कब्जा हटाने की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?
विवाद ने लिया मारपीट तक का रूप
जमीन विवाद के बीच अब परिवारों के बीच गाली-गलौच और मारपीट का मामला भी सामने आया है।आरोप है कि निर्मला सोनी और उनके बेटे रमेश सोनी सहित कुछ लोगों ने अशोक सोनी सहित चार परिवारों के सदस्यों के साथ गाली-गलौच करते हुए डंडों से तक मारपीट की।
इस घटना के बाद गांव का माहौल और तनावपूर्ण हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के विवाद को समय रहते प्रशासनिक स्तर पर नहीं सुलझाया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल:अगर पट्टा अवैध था तो कार्रवाई क्यों नहीं?
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन के सामने है
यदि पट्टा नियमों के विपरीत जारी हुआ था, तो उसे बनाने वाले अधिकारियों और इसमें कथित रूप से शामिल लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि जमीन का रिकॉर्ड किस प्रक्रिया के तहत बदला गया, पट्टा जारी करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए और संबंधित अधिकारियों ने नियमों का पालन किया या नहीं।
साथ ही कथित लेन-देन के आरोपों की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। यदि जांच में रिश्वत या किसी प्रकार के आर्थिक लेन-देन के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की जा रही है।
शेरगढ़ तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
पूरे विवाद में शेरगढ़ तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों और विवाद के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। क्या पूरे पट्टा प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच होगी? क्या कथित रूप से नियम विरुद्ध पट्टा जारी करने वालों की जिम्मेदारी तय होगी? क्या कब्जा हटाने की कार्रवाई होगी? और क्या मारपीट के आरोपों में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई होगी?