Group में जुड़ें
🌎 ब्रेकिंग
🔴 घर के पीछे गांजे का जखीरा छिपाकर ग्राहक तलाश रहा आरोपी गिरफ्तार, 1.42 लाख का माल जब्त 🔴 कमल विहार में आधी रात कार हटाने को लेकर होटल कारोबारी से मारपीट का आरोप, जांच में जुटी पुलिस 🔴 आंगन मिलन सेवा में बच्चों की मासूमियत ने जीता डिप्टी सीएम विजय शर्मा का दिल 🔴 रायपुर में शातिरों का नया तरीका, ऑयल गिरने का झांसा देकर कारोबारी की कार से बैग चोरी 🔴 समय सीमा में कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले 13 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति निरस्त 🔴 कब खत्म होगा 30 साल का इंतजार? गुमियाबेड़ा को अब भी पक्की सड़क की दरकार 🔴 कुरुद में नशीली कैप्सूल की बिक्री का भंडाफोड़, 3 आरोपी गिरफ्तार 🔴 बरसते पानी में कांग्रेस का निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़कर कार्यालय के करीब पहुंचे कार्यकर्ता 🔴 ट्रक-पिकअप की भिड़ंत से 5 युवकों की मौत, 5 गंभीर घायल 🔴 नगर निगम में रिश्वत का खेल! ACB ने 10 हजार लेते कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा
कब खत्म होगा 30 साल का इंतजार? गुमियाबेड़ा को अब भी पक्की सड़क की दरकार
राजनीति

कब खत्म होगा 30 साल का इंतजार? गुमियाबेड़ा को अब भी पक्की सड़क की दरकार

25 Sep 2026 179 Views Public Swar
Top Advertisement
Advertisement
पब्लिक स्वर,नारायणपुर। जिला मुख्यालय से महज 23 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच बसा गुमियाबेड़ा गांव आज भी पक्की सड़क का इंतजार कर रहा है। गांव से नेशनल हाईवे-130डी की दूरी करीब चार किलोमीटर है, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण यह छोटा सा फासला ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। करीब तीन दशक से ग्रामीण पहाड़ों को काटकर अपने आवागमन के लिए कच्चा रास्ता तैयार करते आ रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान पहाड़ों से बहने वाला पानी इन कच्चे रास्तों को बार-बार खराब कर देता है। इसके बाद ग्रामीणों को फिर से रास्ता बनाने की मशक्कत करनी पड़ती है। पहले क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के चलते सड़क और अन्य विकास कार्य प्रभावित होने की बात कही जाती थी। अब इलाके में परिस्थितियां पहले की तुलना में अनुकूल होने के बावजूद गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है।

राशन के लिए 7 किलोमीटर पैदल सफर

गांव में सड़क नहीं होने का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन लेने के लिए उन्हें करीब सात किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है। राशन मिलने के बाद उसे कंधे पर लादकर वापस गांव लाना पड़ता है। बारिश के मौसम में नदी-नालों में पानी बढ़ने से यह सफर और मुश्किल हो जाता है।

मरीज और गर्भवती महिलाओं को कांवड़ का सहारा

सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। सड़क और वाहन की सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं को कांवड़ के सहारे दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पैदल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार नदी-नालों को पार कर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना पड़ता है। ऐसे में समय पर इलाज मिलना भी चुनौती बन जाता है।

वर्षों से सड़क निर्माण की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं। उनका कहना है कि गांव तक ऐसी सड़क बननी चाहिए, जिससे कम से कम एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहन पहुंच सकें। सड़क के अभाव का असर राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी सुविधाओं की पहुंच पर भी पड़ रहा है।

सीईओ बोले- मौसम खुलते ही सड़क निर्माण पर होगा काम

इस मामले में जनपद पंचायत ओरछा के अधिकारी ने कहा कि यह क्षेत्र अब तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा है और यहां परिस्थितियां विषम थीं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से परिस्थितियां अनुकूल हुई हैं। मौसम खुलने के बाद क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण कराया जाएगा और गुमियाबेड़ा की सड़क भी बनाई जाएगी।

पहाड़ों के बीच बसे गुमियाबेड़ा के ग्रामीणों के लिए फिलहाल चार किलोमीटर दूर मौजूद नेशनल हाईवे-130डी तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। अब ग्रामीणों को इंतजार है कि प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण की घोषणा कब जमीन पर दिखाई देती है।

Advertisement
Advertisement

छत्तीसगढ़ जिला