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भारत लाए जाने से पहले सौरभ चंद्राकर ने जताई हत्या की आशंका, मांगी सुरक्षा
राजनीति

भारत लाए जाने से पहले सौरभ चंद्राकर ने जताई हत्या की आशंका, मांगी सुरक्षा

21 Aug 2026 570 Views Public Swar
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पब्लिक स्वर,रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में कथित किंगपिन सौरभ चंद्राकर ने भारत लाए जाने से पहले अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ओमान में हिरासत में लिए गए चंद्राकर ने कथित तौर पर ओमान पुलिस अधिकारियों के सामने आशंका जताई है कि भारत आने के बाद उसकी जान को खतरा हो सकता है। उसने सुरक्षा मिलने की स्थिति में भारतीय जांच एजेंसियों के सामने सट्टा नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी और सबूत साझा करने की पेशकश की है।

जानकारी के मुताबिक, चंद्राकर ने दावा किया है कि वह भारत आने के बाद सक्षम जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार है। उसने मांग की है कि उसे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों से अलग और सुरक्षित रखा जाए, ताकि वह बिना किसी दबाव के जांच में सहयोग कर सके। साथ ही उसने अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है।

चंद्राकर ने कथित तौर पर जांच एजेंसियों को सट्टा कारोबार से जुड़े राजनीतिक संपर्कों, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों से संबंधित जानकारी देने की बात कही है। उसने पूछताछ के दौरान न्यायिक निगरानी के साथ इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां उसके द्वारा दी जाने वाली किसी भी जानकारी और दावों की अपने स्तर पर जांच करेंगी।

इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर ओमान पुलिस ने सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया है। भारत की एजेंसियां उसे भारत वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं। वहीं, ओमान में उसके खिलाफ अलग कानूनी कार्रवाई भी चल रही है, जिसे चंद्राकर ने अपने वकील के माध्यम से चुनौती दी है।

महादेव ऐप को लेकर जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह देश के बड़े गैरकानूनी ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट में से एक था। सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस नेटवर्क को व्यापक स्तर पर संचालित किया। आरोप है कि नेटवर्क के जरिए बेटिंग पैनल चलाए जाते थे, यूजर्स को जोड़ा जाता था और अलग-अलग गेम तथा बेटिंग मार्केट संचालित किए जाते थे।

जांच के अनुसार, कथित अवैध कमाई को कई स्तरों पर म्यूल बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी और इसके बाद रकम का एक हिस्सा विदेशों में ट्रांसफर किया जाता था। एजेंसियों का यह भी आरोप है कि अपराध से अर्जित रकम का कुछ हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी के रूप में दिया जाता था।

हालांकि, सौरभ चंद्राकर की ओर से सुरक्षा की मांग या जांच में सहयोग करने की पेशकश अपने आप में किसी कानूनी छूट का आधार नहीं है। उसके खिलाफ दर्ज मामलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि वह जांच एजेंसियों को कोई नई जानकारी या सबूत देता है, तो उसकी सत्यता और मामले से संबंधितता की जांच के बाद ही उसका कानूनी महत्व तय होगा।

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