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धमतरी के स्कूल में छात्र ने 12 से अधिक बच्चों को काटा, कारणों की जांच जारी
पब्लिक स्वर,धमतरी। धमतरी जिले के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सिलौटी में गुरुवार को एक असामान्य घटना से स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। स्कूल के एक छात्र ने अचानक अपना व्यवहार बदलते हुए सहपाठियों को काटना शुरू कर दिया। इस घटना में एक दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए। सभी प्रभावित बच्चों को एहतियात के तौर पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां उन्हें रेबीज रोधी (एंटी-रेबीज) वैक्सीन लगाई जा रही है।
अचानक बदला छात्र का व्यवहार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई के दौरान संबंधित छात्र का व्यवहार अचानक असामान्य हो गया। देखते ही देखते उसने आसपास मौजूद कई छात्रों को काट लिया। घटना के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षकों ने तत्काल हस्तक्षेप कर छात्र को अन्य बच्चों से अलग किया और स्थिति को नियंत्रित किया।
घायल छात्रों का इलाज शुरू
घटना के तुरंत बाद घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार सभी प्रभावित बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह एहतियाती कदम है, ताकि किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सके।
तीन साल पहले कुत्ते के काटने की जानकारी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित छात्र को लगभग तीन वर्ष पहले एक रेबीज संक्रमित कुत्ते ने काटा था। उस समय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उसे रेबीज रोधी टीकों का पूरा कोर्स दिया गया था।
हालांकि, वर्तमान घटना का उस पुराने मामले से कोई संबंध है या नहीं, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चिकित्सक इस पहलू की जांच कर रहे हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
छात्र को जिला अस्पताल रेफर
घटना के बाद संबंधित छात्र को विस्तृत चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। डॉक्टर उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति की जांच कर रहे हैं ताकि उसके व्यवहार में आए अचानक बदलाव का वास्तविक कारण पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की अपील
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल पहुंची और पूरे मामले का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी है और किसी भी तरह की अटकलें लगाना उचित नहीं होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। साथ ही प्रभावित बच्चों के उपचार और निगरानी की पूरी व्यवस्था की गई है।