राख से कोयला निकालते वक्त अचानक धंस गई सुरंग,तीन की मौत
पब्लिक स्वर,रायपुर। मिली जानकारी के अनुसार सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री से निकले वाली राख (फ्लाईएश) में मंगलवार की सुबह तीन जिंदगियां राख में दफन हो गई। इस हादसे के बाद से यह सवाल खड़ा हो गया है कि इसके जिम्मेदार कौन हैं ? ग्रामीणों की गरीबी, फैक्ट्री संचालक या शासन-प्रशासन। धरसींवा में यह पहला हादसा नहीं है। वर्ष-2017 में कूंरा में ऐसा ही हादसा हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शासन-प्रशासन की ओर से न तो पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया गया और न ही किसी पर कोई कार्रवाई की गई। वहीं ग्रामीणों के समक्ष आज भी खाना बनाने की गंभीर समस्या बनी हुई है। यहां के लोग राख से निकले कोयले के चूर्ण से गोला (लड्डू) बनाकर चूल्हा जलाने में उपयोग करते हैं। मृतका पांचो गहरे के पति आनंद गहरे ने बताया कि रोज की तरह वह राख लेने के लिए गई थी। उसके साथ कामू और शुभ्रदा भी राख की खोदाई करके बोरियों में भर रहे थे। इस दौरान सुरंग धंस गई। सुरंग धंसने की आवाज आने पर कुछ दूर पर ही स्थित तालाब में नहा रहे लोग चीख पड़े। उनकी आवाज सुनकर बस्ती के लोग पहुंचे। जिसके बाद राख के ढेर में दबे लोगों को बाहर निकाला गया। घटनास्थल पर ही तीन लोगों की मौत व्हो गई थी। स्थानीय रहवासियों ने राख डंप करने वाले और डंप कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि राख डंप करने से कई जगह इसी तरह खतरा बना हुआ है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
चूल्हा जलता है राख से
ग्रामीणों ने बताया कि कई घरों में राख से बनाए जाने वाले लड्डू से ही खाना बनता है। कई परिवार लंबे समय से इसी से अपनी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मंगलवार के हादसे के बाद घटनास्थल पर टूटी चप्पलें, जूते और भरी-खाली बोरियां पड़ी थीं। स्वजन की सिसिकियां सुनाई दे रही थी।
किशोरी हुई अनाथ
हादसे के बाद से किशोरी गोदावरी मनहरे अनाथ हो गई है। गोदावरी ने बताया कि जब वह छोटी थी, तब उसके पिता मंगलदास मनहरे का निधन हो गया। हादसे में उसकी मां मोहर बाई और भाई पुनीत की मौत हो गई है। पांचो बाई के बेटे और बेटियों के सिर से भी मां का साया उठ गया है।