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43 डिग्री की तपिश में जनगणना प्रैक्टिकल, प्रगणकों को प्याज-टॉवेल से मिली राहत
राजनीति

43 डिग्री की तपिश में जनगणना प्रैक्टिकल, प्रगणकों को प्याज-टॉवेल से मिली राहत

21 Apr 2026 331 Views Public Swar
पब्लिक स्वर,गरियाबंद। गरियाबंद जिले में भीषण गर्मी के बीच जनगणना 2027 की तैयारियों ने प्रशासनिक संवेदनशीलता और जमीनी चुनौतियों—दोनों को एक साथ उजागर किया है। 43 डिग्री सेल्सियस तापमान में फील्ड प्रैक्टिकल कर रहे प्रगणकों के लिए तहसील स्तर पर की गई व्यवस्थाएं इस बात का संकेत हैं कि इस बार जनगणना सिर्फ तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव संसाधन की सुरक्षा और कार्यक्षमता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

देवभोग तहसील में आयोजित दूसरे चरण के फील्ड प्रैक्टिकल के दौरान घोघर और लाटापारा गांवों में 50-50 प्रगणकों को अभ्यास के लिए भेजा गया। गांव में प्रवेश से पहले ही तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने टीम के साथ प्रगणकों को सफेद टॉवेल और प्याज वितरित किए। यह परंपरागत लेकिन प्रभावी तरीका है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में लू से बचाव के लिए लंबे समय से अपनाया जाता रहा है। इसके अलावा नाश्ते और लौटने पर नींबू शरबत की व्यवस्था कर डिहाइड्रेशन से बचाव सुनिश्चित किया गया।

यह पहल सिर्फ एक औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासन की फील्ड-लेवल समझ को दर्शाती है। चंद्रवंशी का यह बयान कि “अभियान जितना जरूरी है, उतने ही जरूरी इसमें काम करने वाले लोग भी हैं” इस दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। मई महीने में जब वास्तविक अभियान 1 से 30 मई तक चलेगा, तब ऐसी व्यवस्थाओं को व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना भी सामने आई है।

इस बार की जनगणना का एक बड़ा बदलाव इसका पूर्णतः डिजिटल होना है। सभी प्रगणकों को मोबाइल के माध्यम से पेपरलेस डेटा कलेक्शन करना होगा, जिसके लिए एंड्रॉयड 12 वर्जन अनिवार्य किया गया है। यहीं पर एक व्यावहारिक समस्या भी सामने आती है—ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कई प्रगणकों के पास इस स्तर के स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं हैं। परिणामस्वरूप, उन्हें नया मोबाइल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह पहल डिजिटल ट्रांजिशन को तो तेज करती है, लेकिन साथ ही जमीनी स्तर पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी पैदा करती है।

प्रशासन ने प्रगणकों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी तय किए हैं। पूरे अभियान के दौरान 25 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान और प्रशिक्षण अवधि में प्रतिदिन 400 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। हालांकि, इसके साथ सख्त नियम भी लागू किए गए हैं—गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर 1,000 रुपये का जुर्माना और गंभीर मामलों में अधिकतम 3 साल की सजा का प्रावधान है। यह व्यवस्था कार्य में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी या संसाधन संबंधी कमियों को दंडात्मक नजरिए से न देखा जाए।

कुल मिलाकर, गरियाबंद में जनगणना की तैयारियां एक संतुलित मॉडल पेश करती हैं—जहां एक ओर तकनीकी आधुनिकीकरण पर जोर है, वहीं दूसरी ओर फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मॉडल पूरे राज्य और देश में किस हद तक प्रभावी रूप से लागू हो पाता है।

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